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उत्तराखंड में अब बच्चों को भी निशाना बना रहा कोरोना, सरकार की ओर से की जा रही है ये तैयारी, पढ़ें

उत्तराखंड : देश के साथ राज्य में कोरोना संक्रमण से अब बड़े लोगों के साथ मासूम बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस की यह तीसरी लहर बच्चों के लिए बेहद हानिकारक है और तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने की आशंका जताई जा रही है।
राज्य लगातार कोरोना संक्रमण छोटे बच्चों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। हालात ये है कि पिछले पंद्रह दिन में ग्यारह साल तक के उन्नीस बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना वायरस की तीसरी लहर के दस्तक देने से पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी करना शुरू कर दिया है। बच्चों में संक्रमण को बढ़ता देख सरकार अब बच्चों के लिये अलग से अस्पताल बनवाने जा रही है। 
स्वास्थ्य विभाग की ओर से उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर और चंपावत जिले में फैब्रिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने की तैयारी की जा रही है। चारों जिलों के डीएम से प्रस्ताव मांगा गया है। इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। 
शासकीय प्रवक्ता व मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि सरकार इस मामले पर गंभीर है। एक्सपर्टस से राय लेकर इसकी तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार किसी भी कीमत पर कोई रिस्क किसी के जीवन पर लेना नही चाहती है। इन अस्पतालों के अंदर बेड्स के साथ ही वेन्टीलेटर्स एवं अन्य जरूरी उपकरण मौजूद होंगे। 
कुमाऊं के मरीजों का सर्वाधिक भार सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) पर है। यहां बच्चों का 60 बेड का वार्ड है और 20 के करीब एसएनसीयू है। महिला अस्पताल हल्द्वानी में 12 बेड का पीआईसीयू है। डीआरडीओ की ओर से पांच सौ बेड का फैब्रिकेटेड अस्पताल बन रहा है।
इसमें 75 ऑक्सीजन और 50 आईसीयू बेड बच्चों के लिए होंगे। निजी अस्पतालों में केएचआरसी में आठ बेड का एनआईसीयू है, जबकि सेंट्रल हॉस्पिटल में पांच बेड का पीआईसीयू और पांच बेड का एनआईसीयू है। बच्चों के लिए दो वेंटीलेटर हैं। हालांकि, निजी अस्पताल के पीआईसीयू या एनआईसीयू अभी कोविड के लिए प्रयोग नहीं हो रहे हैं। 
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा ने बताया कि सभी सीएमओ को आदेश दिए गए हैं कि बच्चे अगर कोविड की चपेट में आते हैं और उनको इलाज की जरूरत पड़ती है तो फैब्रिकेटेड अस्पताल के लिए तत्काल प्रस्ताव बनाकर भेजें।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी ने बताया कि 50 से 100 बेड के फैब्रिकेटेड अस्पताल का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। अस्पताल के लिए स्थान का चयन भी जल्द कर लिया जाएगा।

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