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रुड़की के इस गांव में 15 दिन में 35 लोगों की हुई मौत, लोग अभी भी मान रहे संदिग्ध बुखार

रूड़की : प्रदेश के सभी जिलों में कोरोना का कहर जारी है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर तेजी से फैल रही है। इस बार गांव भी चपेट में आ रहे हैं। कोरोना संक्रमण की पहली लहर का असर शहरों में अधिक रहा था। गिने-चुने गांव को छोड़ दे तो अधिकांश गांव में कोरोना संक्रमण का एक भी मामला नहीं था। लेकिन, दूसरी लहर से गांव में भी तेजी से संक्रमण फैल रहा है। 
हरिद्वार जिले के रूड़की और आसपास के गांवों में संक्रमण का असर साफ दिखने मिलता है। यहां के नारसन ब्लॉक के लिब्बरहेड़ी गांव में देखा गया कि 15 दिन से हर रोज औसतन दो से तीन मौतें हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार मई में अब तक 35 मौतें हो चुकी हैं। 
गांव में हर तीसरे घर में खांसी और बुखार से परिवार के लोग पीड़ित हैं। ग्रामीणों की मानें तो इस वक्त गांव में करीब पांच सौ लोग बीमार हैं। 
देखा जा रहा है कि नासमझी और लापरवाही के चलते कोरोना शहर के मुकाबले गांव में तेजी से फैल रहा है। इस गाव में कोरोना की दहशत से अब गलियां भी सुनसान पड़ी हैं। हालांकि गांव के लोग इसे अभी भी संदिग्ध बुखार मान रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार लिब्बरहेड़ी में करीब एक महीने पहले सब कुछ ठीक चल रहा था। इसी बीच 24 अप्रैल को गांव में एक व्यक्ति की संदिग्ध मौत हुई। सामान्य मौत मानकर लोगों ने इस घटना पर ध्यान नहीं दिया। इसके दो दिन बाद फिर एक मौत हुई। ऐसे में 30 अप्रैल तक गांव में चार मौतें हुई। ये मौतें लोगों में चर्चा बनने लगी। 
बताया जाता है कि 11 मई को गांव में एक साथ छह मौतें हुईं। अब गांव में आलम ये है कि श्मशान घाट में एक साथ दो से तीन चिता जलाई जा रही हैं। वहीं जो अचानक मौतें हो रही हैं, उन्हें जलाने के लिए दूसरी चिता की आग ठंडी होने का इंतजार करना पड़ रहा है। वर्तमान में भी गांव में करीब 500 लोग ऐसे हैं, जिन्हें बुखार और खांसी की शिकायत है।

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